Repo Rate: इन बैंकों के सस्ते हुए लोन, जानें रेपो रेट कम होने से किसे मिलेगा ज्यादा फायदा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ी घोषणा करते हुए रेपो रेट में आधा प्रतिशत यानी 50 आधार अंकों की कटौती की है।

Reserve Bank Of India: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ी घोषणा करते हुए रेपो रेट में आधा प्रतिशत यानी 50 आधार अंकों की कटौती की है। इसके बाद बैंक भी उधारी दरों में कटौती कर रहे हैं। फिलहाल सरकारी बैंक ऐसा करने में सबसे आगे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि RBI के इस फैसले के बाद नए उधारकर्ताओं के मुकाबले पुराने उधारकर्ताओं को ज्यादा फायदा हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बैंक होम लोन पर लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क में बदलाव कर सकते हैं। पहले से ही बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की होड़ में ये दरें काफी कम थीं। आइए जानते हैं किन बैंकों ने क्या नए बदलाव किए?
बैंक ऑफ बड़ौदा:
इस बैंक ने अपनी रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट यानी की (RLLR) में 0.50 फीसदी की कटौती की है, जिसे बैंक ने 7 जून से लागू किया था। इसकी रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट अब 8.15 फीसदी हो गई है।
पंजाब नेशनल बैंक (PNB):
RBI के रेपो रेट में कटौती के ऐलान के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक PNB ने अपनी RLLR में आधा प्रतिशत की कटौती कर इसे 8.35 फीसदी कर दिया है। बैंक ने यह भी बताया कि इसे 9 जून से लागू किया जाएगा। हालांकि, पीएनबी ने अपनी एमसीएलआर दर में कोई बदलाव नहीं किया है।
बैंक ऑफ इंडिया:

अन्य बैंकों की तरह बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) ने भी अपनी रेपो आधारित उधारी दर में 0.50 फीसदी की कटौती कर इसे 8.35 फीसदी कर दिया है। बैंक ने यह बदलाव 6 जून से लागू किया है।
यूको बैंक:
इस बैंक ने (आरएलएलआर और एमसीएलआर) में कटौती की है। आरएलएलआर को आधा फीसदी घटाकर 8.30 फीसदी कर दिया गया है, जो 9 जून से प्रभावी होगा। सभी अवधि के लिए एमसीएलआर में 0.10 फीसदी (10 आधार अंक) की कमी की गई है। अब इसकी एमसीएलआर 9 फीसदी है।
एचडीएफसी बैंक:

इस बैंक ने 7 जून से सभी अवधि के लिए अपनी एमसीएलआर में 0.10 फीसदी की कटौती की है। अब इसकी ओवरनाइट और एक महीने की दरें 8.9 फीसदी हैं।
पुराने कर्जदारों को कैसे अधिक लाभ पहुंचाया जाए?
भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, फ्लोटिंग रेट लोन की दर को रेपो रेट के हिसाब से खुद ही एडजस्ट करना होता है। जिन लोगों के पास पहले से ही कोई लोन चल रहा है (खासकर जो RLLR/EBLR से जुड़े हैं), उनकी ब्याज दर और EMI अपने आप कम हो जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नए कर्जदारों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल सकता है। क्योंकि बैंक अपने मुनाफे को बचाने के लिए रेपो रेट के ऊपर लगाए जाने वाले अतिरिक्त चार्ज (स्प्रेड) को बढ़ा सकते हैं।












